Guest Corner RSS Feed
Subscribe Magazine on email:    

‘आंदोलनकारी दारुबाज’ का इंटरव्यू !(व्यंग्य)

alcoholic volunteer interview
महाराष्ट्र सरकार ने 25 साल से कम उम्र के नौजवानों के शराब पीने पर रोक लगा दी है। अभिनेता इमरान खान को यह बात अखर गई। वह अब इस संबंध में अदालत का दरवाजा खटखटा चुके हैं। इधर, मेरी मुलाकात एक दारुबाज से हो गई, जो संयोग से आंदोलनकारी भी है। इस दारुबाज आंदोलनकारी ने इमरान खान से अपील की है कि वह भी अपनी मांग के पक्ष में जंतर मंतर पर दारुबाजी का कार्यक्रम करें। ये आंदोलनकारी अपने हज़ारों साथियों के साथ इस आंदोलन में शिरकत करेगा। देश में इन दिनों आंदोलन-आंदोलन खूब खेला जा रहा है, तो क्या पता यह आंदोलन भी सुपरहिट हो जाए। लिहाजा, मैंने इन महाशय का इंटरव्यू कर डाला।
 
सवाल-जनाब, आप जंतर मंतर पर दारुबाजी का कार्यक्रम करना चाह रहे हैं। ऐसा क्यों।
जवाब-इमरान की जीभ पीने को बहुत लबलबा रही है। यही हाल हमारा भी रहता है। वैसे, पीने से उम्र का क्या वास्ता। जब आदमी खुश हो-दुखी हो तो पीए। पीने को उम्र से बांधना संविधान के खिलाफ है।
 
सवाल-रोक लग जाए तो बुराई भी क्या है। नौजवान शराब नहीं पीएंगे तो अच्छा ही होगा।
जवाब-क्या फालतू बात करते हैं। नौजवान नहीं पीएंगे तो कौन पीएगा? क्या सरकार कहती है कि महंगाई 25 साल से कम उम्र के नौजवानों को नहीं सताएगी। पुलिस के डंडे 25 से कम वालों को नहीं झोरेंगे। तो फिर ईश्वर के अद्भुत प्रसाद को ग्रहण करने पर रोक क्यों।
 
सवाल—लेकिन इस आंदोलन से क्या फायदा होगा।
जवाब-देश के समस्त दारुबाज एक प्लेटफॉर्म पर आकर संगठित होंगे। और यह संगठित हो गए तो दुनिया का कोई माई का लाल इनके आगे टिक नहीं सकता। मैं दो पउए पी लेता हूं तो मुहल्ले वाले भाग खड़े होते हैं। अनुभव से बता रहा हूं।
 
सवाल-पर आपको नहीं लगता कि दारुबाजी सेहत के लिए खतरनाक है और इसे छोड़ देना ही फायदेमंद है।
जवाब-आप शायद पीते नहीं है। इसीलिए फालतू तर्क दे रहे हैं। दारु पीने से भूख बहुत लगती है और आदमी के भीतर एक झटपटाहट होती है,जो शरीर को एक्टिव बनाती है। हार्ट-लीवर फेल वाली बात बकवास है। जिनका फेल होना होता है,वह कुर्सी से गिरकर हो लेता है। दारु से एक पॉजिटिविटी आती है। बंदा अंग्रेजी न बोल पाता हो तो उसे दारु पिला दो...वो गोरों से भी तेज अंग्रेजी बोलता है।
 
सवाल-लेकिन, समाज पर बुरा असर पड़ता है।
जवाब-फिर वही बाहियाद तर्क। हरिवंश जी कह गए हैं कि मंदिर मस्जिद बैर कराए मेल कराए मधुशाला। धर्मनिरपेक्ष-जातिनिरपेक्ष और अर्थनिरपेक्ष बनाती है दारु।
 
सवाल-एक निजी सवाल। आपने दारु कब पीना शुरु की।
जवाब-शादी के बाद। एक साल तक रोज शाम को पत्नी को आईलवयू बोला तो दूसरे साल से उसे आदत पड़ गई। जिस दिन आईलवयू न बोलो तो अगले दिन खाने में तेज नमक झोंक दे। ज्यादा गुस्से में हो तो तेज़ मिर्च उढेल दे। यकीं जानिए कोई भी गंभीर बंदा होशो हवास में बीवी को रोज आईलवयू नहीं बोल सकता। मित्र की सलाह पर मैं पीने लगा और चमत्कार हो गया। घर पहुंचते ही बीवी को आईलवयू बोलने लगा...। अब पत्नी भी खुश है और अपन भी।
 
More from: GuestCorner
25054

ज्योतिष लेख