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विद्यारंभ मुहूर्त 2019

विद्यारंभ मुहूर्त के लिए साल 2019 में मान्य सभी शुभ तारीखों की जानकारी आज हम आपको इस लेख के जरिये दे रहे हैं, साथ ही विद्या आरंभ मुहूर्त की आवश्यकता और इसके निष्पादन के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में भी बताएंगे। मनुष्य को जानवरों और अन्य जीव जन्तुओं से जो चीज अलग करती है वह है विवेक और विद्या। इन्हीं दो चीजों के आधार पर मनुष्य इस धरती का सबसे श्रेष्ठ प्राणी कहलाता है। यदि मनुष्य विद्या प्राप्त ना करे तो उसमें और जानवरों में कोई खास अंतर नहीं रह जाता है। वो इसलिए क्योंकि शिक्षा ग्रहण करके ही हम यह जान पाते हैं कि हमारे धर्म, कर्तव्य, जिम्मेदारियां और संस्कार क्या हैं। विद्यारंभ की यदि हम संधि विच्छेद करेंगे तो होगा विद्या+आरंभ। हिंदू धर्म में विद्यारंभ के लिए भी मुहूर्त निकाला जाता है। पंडित द्वारा बताए मुहूर्त पर ही लोग अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं। ऐसी मान्यता है कि मुहूर्त के अनुसार बच्चे को स्कूल भेजने से वह बुद्धिमान होता है और पढ़ाई में हमेशा आगे रहता है।

विद्यारंभ मुहूर्त
विद्यारंभ मुहूर्त 2019
दिनांक वार तिथि नक्षत्र शुभ समय
18 जनवरी 2019 शुक्रवार द्वादशी रोहिणी नक्षत्र 07:15 - 19:26
25 जनवरी 2019 शुक्रवार पंचमी उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र 07:13 - 18:18
30 जनवरी 2019 बुधवार दशमी अनुराधा नक्षत्र 15:33 - 16:40
01 फरवरी 2019 शुक्रवार द्वादशी मूल नक्षत्र 07:10 - 18:51
06 फरवरी 2019 बुधवार द्वितीय धनिष्ठा नक्षत्र 07:07 - 09:53
07 फरवरी 2019 गुरूवार द्वितीय शतभिषा नक्षत्र 07:06 - 18:27
08 फरवरी 2019 शुक्रवार तृतीया पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र 07:05 - 10:18
10 फरवरी 2019 रविवार पंचमी रेवती नक्षत्र 07:04 - 18:15
11 फरवरी 2019 सोमवार षष्टी अश्विनी नक्षत्र 07:03 - 15:21
15 फरवरी 2019 शुक्रवार दशमी मृगशिरा नक्षत्र में 07:27 - 20:13
17 फरवरी 2019 रविवार द्वादशी पुनर्वसु नक्षत्र 06:58 - 08:10
20 फरवरी 2019 बुधवार प्रतिपदा मघा नक्षत्र 17:37 - 29:53
21 फरवरी 2019 गुरूवार द्वितीय उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र 06:55 - 19:50
24 फरवरी 2019 रविवार षष्टी स्वाति नक्षत्र 06:52 - 19:38
28 फरवरी 2019 गुरूवार दशमी मूल नक्षत्र 06:48 - 19:22
01 मार्च 2019 शुक्रवार दशमी पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र 08:39 - 10:42
03 मार्च 2019 रविवार द्वादशी उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र 06:45 - 12:29
08 मार्च 2019 शुक्रवार द्वितीय उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र 06:40 - 18:51
14 अप्रैल 2019 रविवार नवमी पुष्य नक्षत्र 14:09 - 20:24
24 अप्रैल 2019 बुधवार पंचमी मूल नक्षत्र 05:47 - 20:22
25 अप्रैल 2019 गुरूवार षष्टी पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र 05:46 - 12:47
29 अप्रैल 2019 सोमवार दशमी शतभिषा नक्षत्र 05:43 - 08:51
06 मई 2019 सोमवार द्वितीय कृतिका नक्षत्र 16:36 - 19:34
09 मई 2019 गुरूवार पंचमी आर्द्रा नक्षत्र 05:35 - 19:00
10 मई 2019 शुक्रवार षष्टी पुनर्वसु नक्षत्र 05:34 - 19:06
13 मई 2019 सोमवार नवमी मघा नक्षत्र 15:21 - 19:07
15 मई 2019 बुधवार एकादशी उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र 10:36 - 21:28
16 मई 2019 गुरूवार द्वादशी हस्त नक्षत्र 05:30 - 08:15
23 मई 2019 गुरूवार पंचमी उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र 05:27 - 20:46
24 मई 2019 शुक्रवार षष्टी उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र 05:26 - 20:42
29 मई 2019 बुधवार दशमी उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र 15:21 - 20:23
30 मई 2019 गुरूवार एकादशी रेवती नक्षत्र 05:24 - 20:19
31 मई 2019 शुक्रवार द्वादशी अश्विनी नक्षत्र 05:24 - 17:17
05 जून 2019 बुधवार द्वितीय आर्द्रा नक्षत्र 07:22 - 19:55
06 जून 2019 गुरूवार तृतीया पुनर्वसु नक्षत्र 05:23 - 09:55
07 जून 2019 शुक्रवार चतुर्थी पुष्य नक्षत्र 07:38 - 19:47
12 जून 2019 बुधवार दशमी हस्त नक्षत्र 06:06 - 19:28
13 जून 2019 गुरूवार एकादशी चित्रा नक्षत्र 16:49 - 19:24
14 जून 2019 शुक्रवार द्वादशी स्वाति नक्षत्र 05:23 - 10:16
19 जून 2019 बुधवार द्वितीय पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र 05:23 - 19:59

विद्यारंभ संस्कार क्या है

विद्यारंभ संस्कार तब किया जाता है जब बच्चे के अंदर शिक्षा ग्रहण करने की चेतना का विकास होने लगता है। सामान्यतः यह विकास 5 वर्ष की आयु के आसपास होता है। लेकिन अगर किसी बच्चे में यह चेतना पहले ही दिखने लगे तो इस संस्कार को किया जा सकता है। विद्यारंभ संस्कार शुभ तिथि, नक्षत्र, वार और पवित्र माह में संपन्न करने का विधान है। यदि व्यक्ति शिक्षा ग्रहण नहीं करेगा तो वह जिंदगी भर दूसरों पर निर्भर रहेगा। इसलिए शिक्षा ग्रहण करना हर व्यक्ति के लिए जरूरी है। विद्यारंभ संस्कार धर्म, वेद और स्कूली शिक्षा अर्जित करने का प्रथम चरण कहलाता है। इस संस्कार में पूरे विधि विधान के साथ पूजा-अर्चना होती है और ईश्वर से ये प्रार्थना की जाती है कि बच्चे शिक्षा के क्षेत्र में हमेशा अव्वल रहें। विद्यारंभ संस्कार सही ​मुहूर्त में करने से बच्चों में पढ़ाई के प्रति उत्साह तो बढ़ता ही है साथ ही रुचि भी पैदा होती है। इसलिए विद्यारंभ संस्कार को हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण संस्कार बताया गया है।

विद्या आरंभ संस्कार का महत्व

विद्या शब्द का उदय मुख्यतौर से हमारे वेदों से हुआ है। विद्या के माध्यम से बच्चा बड़ा होकर सही-गलत, सच-झूठ और शुभ-अशुभ में अंतर कर पाता है। हिंदू सनातन धर्म को मानने वाले लोग विद्या आरंभ संस्कार को बड़ी गंभीरता से लेते हैं। इसे कराना इसलिए जरूरी होता है क्योंकि विद्यारंभ संस्कार ही एकमात्र माध्यम है जिसके द्वारा बालक-बालिका में उन सभी संस्कारों को डाला जाता है जिनके आधार पर उसकी शिक्षा मात्र ज्ञान न रहकर जीवन निमार्ण करने वाली हितकारी विद्या के रूप में विकसित हो सके। जब यह संस्कार होता है तो पूजा में पेंसिल, रबड़, स्लेट और पट्टी आदि रखे जाते हैं। इस समारोह द्वारा बालक के मन में ज्ञान प्राप्ति के प्रति रुचि पैदा की जाती है और उसे इसका महत्व बताया जाता है। उत्साह भरी मनोभूमि में देवाराधन तथा यज्ञ के संयोग से वांछित ज्ञानपरक संस्कारों का बीजारोपण भी सम्भव हो जाता है। इस संस्कार के अंर्तगत बालक को अक्षर ज्ञान, विषयों के ज्ञान के साथ श्रेष्ठ जीवन के सूत्रों का भी बोध और अभ्यास ​कराया जाता है। इसलिए विद्यारंभ संस्कार को बच्चों के लिए अनिवार्य माना गया है।

विद्यारंभ का सही मुहूर्त

विद्यारंभ के लिए सही मुहूर्त देखना उतना मुश्किल नहीं है जितना कि लोग समझते हैं। पहले के समय में साधनों की कमी के चलते लोगों के पास सिर्फ पंडित या ज्यो​तिष का ही विकल्प होता था। जबकि आज स्थिति ऐसी नहीं है। आज के समय में ऐसे कलेंडर आते हैं जिनमें माहनुसार शुभ ​दिन, मुहूर्त, समय और घड़ी के बारे में आसान शब्दों में लिखा होता है। आप इनकी मदद ले सकते हैं। इसके अलावा आप इसके लिए इंटरनेट और गूगल प्ले की भी मदद ले सकते हैं। क्योंकि वहां कई ऐसी एप्लीकेशन हैं जो आपको विद्यारंभ के लिए शुभ मुहूर्त की जानकारी मिनटों में दे देगी। जो लोग पढ़े लिखे हैं उनके​ लिए इन एप का प्रयोग करना बहुत आसान होता है। इसके बावजूद यदि आपको कोई समस्या या शंका हो रही है तो आप किसी पंडित की भी सलाह ले सकते हैं।

विद्यारंभ के ज्योतिष तथ्य

विद्यारंभ के लिए ज्योतिषशास्त्र के अनुसार चैत्र-वैशाख शुक्ल तृतीया, माघ शुक्ल सप्तमी तथा फाल्गुन शुक्ल तृतीया में यह संस्कार कराना शुभ होता है। जबकि अमावस्या, चतुर्दशी, प्रतिपदा, सूर्य संक्रांति और अष्टमी के दिन विद्यारंभ संस्कार नहीं करना चाहिए। इस पूजा में भगवान गणेश, माता सरस्वती, लेखनी, पट्टी और गुरू की पूजा करना अनिवार्य होता है। विद्यारंभ संस्कार में गुरु पूजा का विशेष महत्व है, क्योंकि गुरु ही बच्चे को शिक्षा प्रदान करते हैं। विद्यारंभ संस्कार के लिए यदि शुभ दिनों की बात करें तो रविवार, सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार उत्तम माने गये हैं। वृषभ, मिथुन, सिंह, कन्या और धनु लग्न विद्यारंभ संस्कार के लिए सबसे उत्तम हैं। प्राचीन काल में यह संस्कार गुरुकुल में संपन्न कराया जाता था। यज्ञ, हवन और पूजा-पाठ के बीच बच्चों को वेदों का अध्ययन कराया जाता था। आज के समय में यह काम घर या स्कूल में किया जा सकता है।

विद्यारंभ के लिए सावधानियां

  • विद्यारंभ संस्कार हमेशा पंडित द्वारा बताई गई तारीख और समय पर ही करना चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया गया तो इससे बच्चे पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का खतरा रहता है।
  • विद्यारंभ संस्कार को घर, मंदिर या फिर किसी धार्मिक स्थल पर किया जा सकता है। इस दौरान पूजा पूरे विधि विधान से होनी चाहिए तभी उसका लाभ मिलता है। यज्ञ और हवन इस संस्कार के अभिन्न अंग हैं।
  • बच्चे के साथ ही उसके माता-पिता और यदि संभव हो तो दादा-दादी का भी पूजा में बैठना अनिवार्य है।
  • माता सरस्वती और भगवान गणेश की मूर्ति को पूजा के वक्त जरूर रखें। कुछ लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए।
  • पूजा में बैठने से पहले बच्चे के साथ माता-पिता का नहाना भी बहुत जरूरी है। साफ वस्त्र पहनकर ही विद्यारंभ संस्कार की पूजा ग्रहण करें।
  • पूजा संपन्न होने के बाद कुछ लोग बेवजह सैर सपाटे पर निकल जाते हैं या फिर घर में मदिरापान या मीट-अण्डे का सेवन शुरू कर देते हैं। याद रखें ऐसा करने से इसका सीधा प्रभाव ​बच्चे पर पड़ेगा।
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