Shayari RSS Feed
Subscribe Magazine on email:    

वादा

sher on promise
मज़हबी दीवारों के साए में अब पतंगे नहीं उड़तीं
कभी मेरी गली की छतों पर शहर बसा करता था।
More from: Shayari
34641

ज्योतिष लेख